देव स्वामी एलियन केंद्र
देव स्वामी एलियन केंद्र
Dev Swami alien Kendra
देव स्वामी एलियन केंद्र भारत की एक अध्यात्मिक संस्था है जो परग्रही अर्थात दूसरे ग्रहों पर रहने वाले लोगों से बातें करती है मिलती है । आज वैज्ञानिक केवल विज्ञान के द्वारा ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं जो अगले 100000 वर्ष तक भी संभव नहीं है। अध्यात्मिक शक्ति जिसे हमारे भारतीय धर्म ग्रंथों में बताया गया है उस शक्ति के द्वारा दूसरे ग्रह के लोग अर्थात एलियन से संपर्क किया जाता है।
जिस ध्वनि के द्वारा एलियन से संपर्क किया जाता है वह ध्वनि इस ब्रह्मांड में दूसरे छोर पर स्थित लोगों के द्वारा प्राप्त किया जाता है और वहां इस ध्वनि को समझने का विज्ञान विकसित है जिसके द्वारा उनसे संपर्क आसानी से हो जाता है।
परग्रही अर्थात एलियन केवल उन्हीं लोगों से संपर्क करते हैं जिसकी आध्यात्मिक शक्ति उच्च स्तर की होती है। इसका मतलब इस आध्यात्मिक शक्ति में वह विज्ञान छुपा है जो उस ग्रह के लोगों द्वारा आसानी से समझा जाता है।
अब हर किसी के मन में यह जिज्ञासा होगी कि यह आध्यात्मिक शक्ति कैसी है कैसे प्राप्त होती है किस को मिल सकती है और अगर यह शक्ति मिल सकती है तो क्या करने पर।
आपकी इस जिज्ञासा भरे प्रश्न का उत्तर हम दे देते हैं ताकि आपके मन को शांति प्राप्त हो। यह आध्यात्मिक शक्ति कई तत्वों के मिलने से बना है, तत्व का मतलब यहां शरीर का तत्व से नहीं है शरीर के तत्व है क्षिति जल पावक गगन समीरा ।लेकिन आध्यात्मिक शक्ति के यह तत्व नहीं है इस जगह पर।
अगर यह सब तत्व नहीं है आध्यात्मिक शक्ति के तो फिर वह तत्व कौन सा है क्या है ? अब इस तत्व को हम एक रहस्य के रूप में समझेंगे क्योंकि यह एक रहस्यमई विषय है रहस्यमई वस्तु है रहस्यमई ज्ञान है। इस रहस्य से पर्दा तभी उठता है जब उस व्यक्ति में आध्यात्मिक विकास पूरे ऊपरी लेवल पर पहुंच जाता है।
उस ऊपरी लेवल पर अर्थात ज्ञान के ऊपरी लेवल पर पहुंचने के लिए हमें कुछ काम करने पड़ते हैं। अपने जीवन की दिनचर्या को बदलनी पड़ती है। ब्रह्मांड के वायुमंडल से कुछ शक्तियों को अपने शरीर में प्रवेश कराना पड़ता है। इन शक्तियों के द्वारा शरीर की कोशिकाओं में परिवर्तन होता है जिसे विज्ञान की भाषा में जीन में परिवर्तन या कोशिका में परिवर्तन कह सकते हैं लेकिन यह उससे भी अलग है शक्तिशाली है।
अपने शरीर में इस ब्रह्मांड ऊर्जा को प्रवेश कराने के लिए शरीर को मानसिक रूप से तैयार करना पड़ता है और शारीरिक रूप से भी मजबूत करना पड़ता है क्योंकि मस्तिष्क अर्थात मन और स्वस्थ शरीर दोनों का मिलन जरूरी है।
यहां आप दर्शनशास्त्र के सिद्धांत के चक्कर में मत पड़ जाएगा वह यहां लागू नहीं होगा। मन और शरीर के बीच का संबंध का वर्णन दो दार्शनिकों ने किया है वह दोनों एक दूसरे के विरोधी सिद्धांत हैं। स्पीनोज और देकार्त यह दो दार्शनिक अर्थात फिलॉसफी जानने वाले हैं जिन्होंने मन अर्थात आत्मा और शरीर के संबंध का वर्णन किया है। देकार्त इसे एक दूसरे का विरोधी बताया है तो वही स्पीनोज ने इसे विरोधी नहीं बताया बल्कि समानांतर बताया है जैसे रेल की पटरी समानांतर होती हैं । एक दूसरे को काटती नहीं विरोधी नहीं हैं। अब आप इस ज्ञान को यहां प्रयोग करेंगे तो फिर इस ज्ञान में उलझ कर रह जाएंगे क्योंकि यह ज्ञान सिर्फ दार्शनिक रूप से बहस का विषय है ना कि इसके द्वारा ब्रह्मांड यहां शक्ति प्रदान करेगी।
आपको यहां फिलॉसफी अर्थात दर्शनशास्त्र का प्रयोग नहीं करना है। अगर हम ऐसा करते हैं तो हम ब्रह्मांड की यह शक्ति प्राप्त नहीं कर सकते। हमें यहां अध्यात्मिक ज्ञान स्पिरिचुअल नॉलेज का प्रयोग करना है और अपने शरीर तथा मन मतलब आत्मा को एकाग्र चित्त करके आपस में मिला करके ब्रह्मांड शक्ति को शरीर में प्रवेश कराना है।
यह एक विशेषज्ञ गुरु की देखरेख में ही हो सकती है जब शरीर में ब्रह्मांड की शक्ति प्रवेश करती है तो मस्तिष्क और शरीर में एक बदलाव करती है। इस बदलाव के द्वारा हमें सुदूर की वस्तु अर्थात दूर की चीजें दिखने लगती है और वहां की आवाज हमें साफ-साफ सुनाई देने लगती हैं। अर्थात एक तरह से हम उस जगह पर होते हैं जहां हमें पहुंचना होता है। हमारे शरीर का स्थूल शरीर का छोटा रूप जिसे सूक्ष्म शरीर कहते हैं वह शरीर से निकलकर ब्रह्मांड के उस ग्रह पर पहुंच जाती है जहां हम पहुंचना चाहते हैं।
यहां भ्रम हमें भ्रमित करते रहती है अर्थात सत्य से दूर ले जाने का कोशिश करती है और यह तब होता है जब हम में ब्रह्मांड ईशक्ति प्रवेश नहीं की हो। लेकिन हम भूलवश समझ जाते हैं कि सारी शक्ति हमारे पास आ चुकी है और अपने मन में कल्पना करने लगते हैं सोचने लगते हैं जो करना चाहते हैं ।अपना मन मस्तिष्क एक फोटो चित्र बना लेती है जिसकी हम कल्पना करते हैं और लगता है कि हम सचमुच उस जगह पर पहुंच चुके हैं जबकि यह एक भ्रम की स्थिति है। दोनों में अंतर करना होगा कि हम कहीं अपनी कल्पना को तो अपने भ्रम को तो सच नहीं मान लिए जबकि सच इससे अलग होता है।
देव स्वामी एलियन केंद्र में इसी सत्य और भ्रम की स्थिति को अलग करके वास्तविक रुप से परिचय कराया जाता है। एलियन परग्रही अर्थात दूसरे ग्रह पर रहने वाले लोग से हम बात करते हैं उन्हें बुलाते हैं हम उनके पास जा नहीं सकते इसलिए हम उन्हें यहीं पर बुलाते हैं। अगर हम जाना चाहे तो हमारे स्थूल शरीर से निकलकर सूक्ष्म शरीर को वहां जाना होता है और यह ब्रह्मांड के किसी भी क्षेत्र में पहुंच जाती हैं।
एलियन किस विषय पर बात करना पसंद करते हैं उन्हें क्या चाहिए यह हम जानेंगे। पृथ्वी के मनुष्य के विचार और परग्रही एलियन के विचार में क्या अंतर है और कितनी समानता है यह अभी आगे जानेंगे। एलियन को अगर पृथ्वी की कोई वस्तु पसंद है या कोई व्यक्ति पसंद है तो उसे किस रूप में मदद करते हैं किस सीमा तक जाकर मदद करते हैं क्या वे इसके लिए कुछ भी कर सकते हैं यह भी हम आगे जानेंगे। क्या वह पृथ्वी के मनुष्य को नुकसान भी पहुंचाते हैं या पहुंचाने की सोचते हैं अगर सोचते हैं तो क्यों उनके मन में यह विचार कब आता है किस हद तक आता है यह भी हम आगे बताएंगे। क्या परग्रही एलियन पृथ्वी के मनुष्य को बहुत कुछ देना चाहते हैं या देकर जाते हैं क्या देते हैं किस रूप में देते हैं यह भी हम आगे बताएंगे।
फिल्म एवं सिनेमा में एलियन के बारे में जो बातें बताई जाती है जो दृश्य दिखाए जाते हैं वह सब एक कल्पना है। इसमें कुछ भी सत्य नहीं है। यह फिल्म दिखाना एक दिखावा का व्यापार है व्यवसाय है अर्थात शो बिजनेस। एलियन से जुड़ी हुई जितनी भी बातें सिनेमा में इंटरनेट पर आपको मिलती है यह मन के द्वारा बनाई गई एक कल्पना है जिसे बेचकर लोग पैसा कमाते हैं अर्थात एलियन के विषय का व्यापार। यहां इस संस्था में इस केंद्र में एलियन के बारे में पूरी बातें अलग से बताई जाती है उनसे संपर्क करने का तरीका और संपर्क कराया जाता है। यह बिना अध्यात्मिक शक्ति के संभव नहीं है विज्ञान को यह करने में 100000 वर्ष से भी ज्यादा समय लगेगा।
वैज्ञानिक भी इस आध्यात्मिक शक्ति को अपने विज्ञान की भाषा में समझने का प्रयत्न कर रहे हैं। वह हर कोशिश कर रहे हैं कि धर्म ग्रंथों में बताई गई इस विद्या को विज्ञान के आधुनिक शब्दों में कैसे परिवर्तित किया जाए। परिवर्तन तो होगा हर ज्ञान का हर विषय का होगा लेकिन इसमें कई 100 साल लग जाएंगे।
देव स्वामी एलियन केंद्र संस्था में आध्यात्मिक शक्ति और विज्ञान की शक्ति को मिलाकर मनुष्य के शरीर में एक परिवर्तन किया जाता है। यह परिवर्तन बहुत ही सकारात्मक अर्थात पॉजिटिव विचारों से भरा होता है। इस स्थिति में हम इस ऊर्जा को जो ब्रह्मांड से प्राप्त किए हैं अपने शरीर से फिर से वापस ब्रह्मांड में भेजते हैं। लेकिन इसकी आवृत्ति अलग होती है। जिस ऊर्जा को हमने शरीर में प्रवेश कराया है उसी ऊर्जा को शरीर से बाहर निकालते हैं लेकिन दोनों ऊर्जा की आवृत्ति में अंतर होता है।
Dev Swami alien Kendra Bharat ki ek aadhyatmik Sanstha hai jo dusre grahon mein Rahane wale logon se a aadhyatmik aur vaigyanik Shakti ke dwara milati hai unse baten karti hai
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